जंग ख़ैबर का पूरा इतिहास (आसान हिंदी में)

"जंग-ए-खैबर इस्लामी इतिहास की एक महान और निर्णायक लड़ाई थी, जिसमें पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की रहनुमाई में मुसलमानों ने यहूदियों के मज़बूत क़िलों को फ़तह किया। इस जंग में हज़रत अली रज़ि॰ की बहादुरी और अल्लाह की मदद का शानदार नमूना देखने को मिला। यह जंग इस्लाम की सच्चाई, हिम्मत और इंसाफ़ की मिसाल बन गई।"

जंग ख़ैबर इस्लाम के इतिहास की एक बड़ी और अहम जंग थी। यह लड़ाई इस्लाम और यहूदी क़बीलों के बीच लड़ी गई थी, जो मदीना से लगभग 150 किलोमीटर उत्तर में स्थित ख़ैबर के इलाके में रहते थे। यहूदी क़बीलों ने मदीने के मुसलमानों के खिलाफ कई बार साज़िशें की थीं, यहाँ तक कि उन्होंने खंदक की जंग में भी दुश्मनों का साथ दिया था। इसलिए नबी करीम ﷺ ने फैसला किया कि अब ख़ैबर की तरफ कूच करना चाहिए।


ख़ैबर कहाँ है?

ख़ैबर सऊदी अरब के उत्तरी हिस्से में स्थित एक क़िला-बस्ती थी, जहाँ यहूदी बहुत बड़ी तादाद में रहते थे। यह इलाका खेती, खजूर और पानी के कुंओं के लिए मशहूर था। यहाँ पर नौ (9) मज़बूत क़िले थे और हर क़िले में काफी हथियार और साज़ो-सामान जमा किया गया था।


जंग की वजह

  1. यहूदी क़बीलों की साज़िशें: बार-बार मदीना के खिलाफ साज़िशें करना।
  2. खंदक की जंग में दुश्मनों का साथ देना
  3. इस्लाम के फैलने को रोकने के लिए हमलों की तैयारी

इन सब वजहों से नबी ﷺ ने 7 हिजरी में ख़ैबर की तरफ फौज भेजी।


नबी ﷺ का लश्कर

नबी ﷺ लगभग 1600 सहाबा के साथ ख़ैबर की तरफ रवाना हुए। मुसलमानों का लश्कर चुपचाप चल रहा था ताकि यहूदियों को पता न चले।

जब मुसलमान ख़ैबर पहुँचे, तो यहूदी अपने खेतों में काम कर रहे थे। जब उन्होंने मुसलमानों को देखा तो चिल्ला पड़े:
“मुहम्मद आ गए हैं!”
और सब लोग डर कर अपने-अपने क़िलों में छुप गए।


ख़ैबर के क़िले

ख़ैबर में कुल 9 मज़बूत क़िले थे:

  1. क़मूस
  2. नाताह
  3. शीक
  4. सुब्बान
  5. नस्र
  6. बिन अतनाब
  7. क़लअत-उज़-ज़ुबैर
  8. वतिह
  9. सलालिम

इन क़िलों को एक-एक करके फतह करना मुसलमानों के लिए बहुत बड़ा चैलेंज था।


हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु का बहादुरी भरा क़िस्सा

जब एक-एक करके क़िले मुसलमानों ने फतह कर लिए, तब बारी आई सबसे मज़बूत क़िले “क़मूस” की।

नबी ﷺ ने सबसे पहले कुछ सहाबा को यह क़िला फतह करने के लिए भेजा, मगर यहूदी बहुत मज़बूती से लड़े और हर बार मुसलमानों को वापिस लौटना पड़ा۔

अगली सुबह नबी ﷺ ने फ़रमाया:

“कल मैं यह झंडा उस आदमी को दूँगा जो अल्लाह और उसके रसूल से मोहब्बत करता है, और अल्लाह और उसका रसूल उससे मोहब्बत करते हैं।”

सभी सहाबा को उम्मीद थी कि झंडा उन्हें मिलेगा।

अगली सुबह नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“अली कहाँ हैं?”

कहा गया:
“उनकी आंखें दुख रही हैं, बहुत तेज़ दर्द है।”

नबी ﷺ ने हज़रत अली को बुलवाया, और अपने मुबारक लुआब को उनकी आँखों में लगाया। फ़ौरन उनकी आँखें ठीक हो गईं। नबी ﷺ ने उन्हें झंडा सौंपा।

हज़रत अली की बहादुरी

हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने अल्लाह के नाम पर आगे बढ़ कर दुश्मनों से बहादुरी से लड़ाई की। दुश्मन फतेह से पहले एक बहुत बड़ा और बहादुर योद्धा सामने आया — मरहब। मरहब बहुत नामी और मज़बूत यहूदी फाइटर था।

मरहब ने कहा:

“ख़ैबर जानता है कि मैं उसका सबसे बहादुर और लड़ाकू इंसान हूँ!”

हज़रत अली ने जवाब दिया:

“मैं वो हूँ जिसे उसकी माँ ने ‘हैदर’ नाम दिया — शेर!”

फिर दोनों में जबरदस्त मुकाबला हुआ और हज़रत अली ने सिर्फ एक वार में मरहब को खत्म कर दिया।

इसके बाद मुसलमानों ने “क़मूस” क़िला फतह कर लिया।


जंग के नतीजे

  • मुसलमानों ने सारे 9 क़िले फतह कर लिए।
  • भारी मात्रा में माल-ए-ग़नीमत मिला।
  • यहूदियों ने सुलह कर ली कि वो ख़ैबर में रह सकते हैं लेकिन हर साल आधा माल मुसलमानों को देंगे।
  • इस्लाम की ताकत पूरे अरब में फैल गई।

हज़रत सफ़िया रज़ियल्लाहु अन्हा से निकाह

ख़ैबर की फतह के बाद नबी ﷺ ने हज़रत सफ़िया बिन्त हुयय से निकाह किया। वो एक यहूदी क़बीले के मुखिया की बेटी थीं। उन्होंने खुद इस्लाम कबूल किया और नबी ﷺ की अज़वाज-ए-मुत्तहरात में शामिल हो गईं।


इस जंग से हमें क्या सबक मिलता है?

  1. बहादुरी और अल्लाह पर भरोसा: चाहे दुश्मन कितना ही मज़बूत हो, अल्लाह की मदद से जीत मिलती है।
  2. सच्चाई की ताकत: हज़रत अली की बहादुरी हमें बताती है कि सच्चा मोमिन कभी हार नहीं मानता।
  3. साफ नियत का इनाम: जिनका दिल साफ हो, अल्लाह उन्हें सबसे मुश्किल वक्त में कामयाबी देता है।

नतीजा

जंग ख़ैबर इस्लाम की एक बड़ी जीत थी। इस जंग ने मदीने को दुश्मनों की साज़िशों से महफूज़ कर दिया और पूरे अरब में मुसलमानों की ताकत को साबित किया।


Saifullah Qamar Shibli

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