जाबिर बिन हयान, जिन्हें दुनिया “रसायन शास्त्र (Chemistry) का पिता” कहती है, एक ऐसे वैज्ञानिक थे जिन्होंने दुनिया को नई राह दिखाई। उनकी जिंदगी और खोजों ने इंसानी इतिहास को बदला, लेकिन अफसोस! हम मुसलमानों ने उनकी विरासत को भुला दिया।
जाबिर बिन हयान की जिंदगी: एक प्रेरणादायक कहानी
जाबिर बिन हयान का जन्म 721 ईस्वी में ईरान के तूस शहर में हुआ। उनका पूरा नाम अबू मूसा जाबिर बिन हयान था। उनके पिता अहमद हयान दवाएँ बेचते थे और अब्बासी खलीफाओं के खिलाफ लड़ते थे। दुख की बात है कि जाबिर के जन्म के बाद उनके पिता को पकड़कर मार दिया गया। फिर जाबिर और उनकी माँ यमन चले गए।
यमन में जाबिर ने एक अच्छे शिक्षक हरबी अल-हिमयरी से कुरान, गणित (Mathematics), और दूसरे विषय सीखे। उनकी माँ उन्हें गाँव में रिश्तेदारों के पास भेजती थीं, इसलिए उनकी स्कूली पढ़ाई ज्यादा नहीं हो पाई। लेकिन जाबिर का मन हमेशा कुछ नया सीखने को बेचैन रहता था। जवानी में वे कूफा लौटे और इमाम जाफर सादिक जैसे महान गुरु के शिष्य बने। उनके मदरसे में मज़हब के साथ तर्क (Logic), दर्शन (Philosophy), और रसायन शास्त्र (Chemistry) पढ़ाया जाता था। यहीं से जाबिर का वैज्ञानिक बनने का सफर शुरू हुआ।
कूफा में जाबिर ने अपनी प्रयोगशाला बनाई और सोना बनाने की कोशिश की। भले ही वे सोना न बना पाए, लेकिन उनकी मेहनत ने रसायन शास्त्र (Chemistry) को एक नया विज्ञान बना दिया। 815 ईस्वी में, 94 साल की उम्र में कूफा में उनका निधन हुआ। उनकी जिंदगी हमें सिखाती है कि मुश्किलें चाहे कितनी भी हों, जुनून रास्ता बना ही लेता है।
जाबिर का ज्ञान: रसायन शास्त्र (Chemistry) की नींव
जाबिर ने रसायन शास्त्र (Chemistry) को एक कला से विज्ञान बनाया। उनके कुछ बड़े काम इस तरह हैं:
1. आसवन (Distillation): जाबिर ने एक यंत्र बनाया, जिसे “कुरअ अल-अंबीक” कहते थे। यह आज के रिटॉर्ट (Retort) जैसा था। इसके जरिए रसायनों को गर्म करके भाप बनाते और फिर ठंडा करके तरल में बदलते थे। यह आज पेट्रोल, इत्र, और जूस बनाने में काम आता है।
2. अम्लों की खोज (Discovery of Acids): जाबिर ने कई अम्ल खोजे, जैसे गंधक का तेजाब (Sulfuric Acid) और एक्वा रेजिया (Aqua Regia), जो सोने को भी पिघला सकता है। इन अम्लों ने धातुओं की जाँच को आसान किया।
3. धातुओं का सिद्धांत (Theory of Metals): जाबिर ने कहा कि सभी धातुएँ गंधक (Sulfur) और पारा (Mercury) के मिश्रण से बनती हैं। यह सिद्धांत अब पुराना हो चुका है, लेकिन इसने रसायन शास्त्र (Chemistry) को आगे बढ़ाया।
4. प्रयोगशाला के यंत्र (Laboratory Equipment): जाबिर ने कई यंत्र बनाए, जिनसे रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रयोग आसान हुए। उनकी किताबों में रसायनों के गुण और बनाने के तरीके लिखे हैं।
5. किताबें (Books): जाबिर ने सैकड़ों किताबें लिखीं। उनकी मशहूर किताब “किताब अल-किमिया” ने यूरोप में रसायन शास्त्र (Chemistry) को मशहूर किया।
आज जाबिर के रसायन शास्त्र (Chemistry) से फायदे
जाबिर के काम ने आधुनिक रसायन शास्त्र (Chemistry) की नींव रखी। आज इसके फायदे हर जगह दिखते हैं:
1. उद्योग (Industry): आसवन (Distillation) की तकनीक से पेट्रोल, रसायन, और ईंधन बनते हैं। इत्र और जूस उद्योग भी इस पर चलते हैं।
2. चिकित्सा (Medicine): जाबिर की दवाओं की खोज (Pharmaceutical Research) ने आधुनिक दवाइयाँ बनाने में मदद की। उनके अम्ल (Acids) आज दवाओं की जाँच में काम आते हैं।
3. धातु विज्ञान (Metallurgy): उनकी खोजों ने धातुओं को बेहतर बनाने और उनकी जाँच के तरीके दिए, जो इंजीनियरिंग (Engineering) में इस्तेमाल होते हैं।
4. पर्यावरण (Environment): उनके रसायनों की समझ से आज प्रदूषण नियंत्रण (Pollution Control) और रीसाइक्लिंग (Recycling) में मदद मिलती है।
5. शिक्षा (Education): जाबिर की किताबें यूरोप में सैकड़ों साल तक पढ़ी गईं और साइंस के नियम बनाए।
जाबिर का रसायन शास्त्र (Chemistry) आज हमारी जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन हमने इसका हक अदा नहीं किया
जाबिर पर फतवा क्यों?
जाबिर पर फतवे की बात सुनकर दिल रोता है। कुछ लोगों ने उन पर जादूगरी (Sorcery) और कुफ्र का इल्जाम लगाया, क्योंकि वे सोना बनाने की कोशिश करते थे। उस समय रसायन शास्त्र (Chemistry) को जादू समझा जाता था। कुछ ने उनके शिया होने और इमाम जाफर सादिक से नजदीकी को गलत ठहराया, क्योंकि अब्बासी दौर में शिया मुसलमानों पर सियासी दबाव था। कुछ ने उन पर “जिंदिक” (नास्तिकता) का इल्जाम लगाया, जो उस समय नए विचारों वालों पर लगता था।
हालांकि जाबिर को सजा नहीं मिली, लेकिन इन इल्जामों ने उनके रसायन शास्त्र (Chemistry) को मुस्लिम दुनिया में बदनाम किया। यह हमारा दुख है कि हमने अपने हीरो को गलत समझ लिया।
गैर-मुसलमानों ने जाबिर से क्या हासिल किया?
जाबिर के रसायन शास्त्र (Chemistry) ने यूरोप को नई रोशनी दी। उनके फायदे इस तरह हैं:
1. किताबों का अनुवाद (Translation of Books): जाबिर की किताबें, जैसे “किताब अल-किमिया”, लैटिन में अनुवाद हुईं और यूरोप की यूनिवर्सिटी में पढ़ी गईं।
2. आसवन और यंत्र (Distillation and Equipment): उनके यंत्रों और आसवन (Distillation) ने यूरोप में रसायन शास्त्र (Chemistry) को बढ़ाया, जो औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) का आधार बना।
3. अम्लों का उपयोग (Use of Acids): उनके अम्लों (Acids) ने धातु और दवा उद्योग (Metallurgy and Pharmacy) को नई ऊँचाइयाँ दीं।
4. वैज्ञानिक सोच (Scientific Approach): जाबिर का कहना था, “हम वही लिखते हैं जो हमने देखा और आजमाया।” यह यूरोप में वैज्ञानिक शोध (Scientific Research) की नींव बना।
5. प्रभाव (Influence): अंग्रेज वैज्ञानिक फ्रांसिस बेकन ने जाबिर को “रसायन शास्त्र (Chemistry) का पिता” कहा। ब्रिस्टली जैसे वैज्ञानिकों ने उनकी किताबें पढ़ने के लिए अरबी सीखी।
यूरोप ने जाबिर को अपनाया और उनके रसायन शास्त्र (Chemistry) को आगे बढ़ाया, लेकिन हम पीछे रह गए।
मुसलमानों ने जाबिर से फायदा क्यों नहीं उठाया?
यह सवाल हमारे दिल को कुरेदता है। हमने जाबिर जैसे वैज्ञानिक को क्यों खो दिया? इसके कुछ कारण हैं:
1. धार्मिक गलतफहमियाँ (Religious Misunderstandings): जाबिर पर जादूगरी (Sorcery) और कुफ्र के इल्जामों ने उनके रसायन शास्त्र (Chemistry) को संदिग्ध बना दिया।
2. सियासी अशांति (Political Instability): अब्बासी दौर के बाद मुस्लिम दुनिया में सियासी उथल-पुथल ने वैज्ञानिक शोध (Scientific Research) को कमजोर किया।
3. शिक्षा का पतन (Decline of Education): बगदाद का दारुल हिकमत जैसे केंद्र, जो जाबिर के समय चमकते थे, बाद में खत्म हो गए।
4. पश्चिम की प्रगति (Western Progress): यूरोप ने जाबिर की किताबों का अनुवाद किया और शोध (Research) किया, जबकि हमने अपनी विरासत को भुला दिया।
5. बौद्धिक ठहराव (Intellectual Stagnation): कुछ धार्मिक लोगों ने विज्ञान को धर्म के खिलाफ समझा, जिसने शोध की भावना को खत्म किया।
हमारी गलती थी कि हमने अपने वैज्ञानिकों को नहीं अपनाया, और आज हम साइंस में पीछे हैं।
निष्कर्ष: एक जज्बाती पुकार
जाबिर बिन हयान हमारी शान हैं, हमारा गर्व हैं। उन्होंने रसायन शास्त्र (Chemistry) को जन्म दिया, लेकिन हमने उनकी कद्र नहीं की। उनके यंत्र, उनकी खोजें, उनकी किताबें आज भी दुनिया को रोशन कर रही हैं, लेकिन हम अंधेरे में भटक रहे हैं। ऐ मेरे मुस्लिम भाइयो और बहनों, जागो! जाबिर की कहानी से सीखो। उनका जुनून, उनकी मेहनत, और उनका यकीन हमें बताता है कि कोई मुश्किल हमें नहीं रोक सकती।
आज हमें जाबिर जैसे वैज्ञानिकों को स्कूलों में, मदरसों में पढ़ाना होगा। उनके रसायन शास्त्र (Chemistry) को समझना होगा। हमें वैज्ञानिक शोध (Scientific Research) को बढ़ावा देना होगा। जाबिर का सपना हमारा सपना है—एक ऐसी दुनिया, जहाँ मुस्लिम फिर से ज्ञान की रोशनी फैलाएँ। उनका पैगाम था: “प्रयोग ही ज्ञान की नींव है।” आओ, इस पैगाम को दिल में उतारें और अपनी नई पीढ़ी को साइंस की राह दिखाएँ।
सैफुल्लाह कमर शिबली