उत्तर कोरिया के लोग कैसे रहते हैं? – एक अजीब और चौंकाने वाली दुनिया

उत्तर कोरिया दुनिया का ऐसा देश है जहाँ आम जनता की ज़िंदगी पर सरकार का पूरा नियंत्रण होता है। इस लेख में आप जानेंगे कि वहाँ के लोग कैसे जीते हैं, उन्हें इंटरनेट, मीडिया, बोलने और घूमने तक की आज़ादी क्यों नहीं है, और कैसे एक तानाशाही शासन उनके हर कदम को तय करता है। पढ़िए एक अजीब, चौंकाने वाली और हैरान कर देने वाली हकीकत।


क्या आप सोच सकते हैं कि आज के दौर में भी एक ऐसा देश है, जहाँ किसी को फ़ोन करने से पहले सरकार से इजाज़त लेनी पड़ती है?

जहाँ अपनी मर्ज़ी से कपड़े पहनना, किताब पढ़ना या गाना सुनना भी जुर्म माना जाता है?

जहाँ बच्चे अपने नेता को भगवान की तरह पूजते हैं?

यह कोई फिल्म नहीं, बल्कि हकीकत है — उत्तर कोरिया।

इस लेख में हम आपको एक ऐसी दुनिया में ले चलते हैं, जो चौंकाने वाली, अनोखी और हैरान कर देने वाली है।

चलिए जानते हैं उत्तर कोरिया के आम लोगों की ज़िंदगी कैसी होती है।


1. देश का परिचय – पर्दों के पीछे छुपी दुनिया

उत्तर कोरिया को DPRK (Democratic People’s Republic of Korea) भी कहा जाता है।

यह पूरी दुनिया से लगभग कटा हुआ देश है।

यहाँ के लोग विदेश नहीं जा सकते, न ही किसी विदेशी से संपर्क कर सकते हैं, और न ही असली इंटरनेट चला सकते हैं।

यहाँ पर सरकार एक ही परिवार के हाथ में है:

  • पहले किम इल सुंग
  • फिर उनके बेटे किम जोंग इल
  • और अब उनके पोते किम जोंग उन

यह एक तरह की तानाशाही सरकार है, जो हर चीज़ पर कड़ा नियंत्रण रखती है।


2. नेता की पूजा – तस्वीर भी पवित्र

उत्तर कोरिया में नेता को भगवान जैसी इज्ज़त दी जाती है।

हर घर में उनकी तस्वीर लगाना जरूरी है, और रोज़ उसकी सफाई करनी पड़ती है।

अगर कोई तस्वीर को गंदा छोड़ दे, तो उसे सज़ा दी जाती है।

स्कूलों में बच्चे नेता की तारीफ़ में कविताएं याद करते हैं, गीत गाते हैं और उसकी इबादत जैसी बातें करते हैं।


3. इंटरनेट = सिर्फ सरकार का

उत्तर कोरिया के लोग असली इंटरनेट इस्तेमाल नहीं कर सकते।

वो केवल एक सरकारी नेटवर्क “Kwangmyong” चला सकते हैं, जिसमें केवल वही वेबसाइटें होती हैं जिन्हें सरकार ने मंज़ूरी दी हो।

  • गूगल, यूट्यूब, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम – सब कुछ बैन है।
    अगर कोई चोरी-छुपे विदेशी मोबाइल या इंटरनेट इस्तेमाल करता है, तो उसे जेल या मौत की सज़ा भी हो सकती है।

4. मीडिया – सिर्फ सरकार का

टीवी, रेडियो, अखबार – सब कुछ सरकार के कंट्रोल में है।

लोग खुद से कुछ नहीं देख सकते।

सिर्फ वही खबरें दिखाई जाती हैं जो किम जोंग उन की तारीफ़ करती हों और बाकी दुनिया को दुश्मन बताती हों।


5. बालों की स्टाइल पर भी नियम

यहाँ केवल 28 हेयरस्टाइल की इजाज़त है।

अगर कोई इनसे अलग बाल कटवाए, तो उसे सज़ा मिल सकती है।

और खास बात – किम जोंग उन जैसी हेयरस्टाइल आम लोगों के लिए बैन है।


6. शहर में रहना = सरकार की इजाज़त

उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग बहुत खूबसूरत शहर है, लेकिन वहाँ कोई भी नहीं रह सकता।

केवल सरकार के वफादार लोग ही वहाँ रह सकते हैं।

बाकी गांवों में बिजली, पानी और अस्पताल की हालत बहुत खराब है।


7. हर कदम पर नजर

यहाँ हर मोहल्ले में सरकारी जासूस होते हैं।

वो देखते हैं कि कौन क्या बात कर रहा है, किससे मिल रहा है, कौन शादी कर रहा है।

हर चीज़ पर सरकार की नजर होती है।


8. पढ़ाई = नेता की महानता

बच्चों को स्कूल में गणित या विज्ञान कम, नेता की तारीफ़ ज्यादा सिखाई जाती है।

उन्हें बताया जाता है कि उनका नेता सबसे बड़ा, सबसे बुद्धिमान और दुनिया को बचाने वाला है।


9. परिवार को भी सज़ा

अगर कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ कुछ कहे या करे, तो उसके पूरे परिवार को सज़ा दी जाती है

माँ, बाप, भाई-बहन — सबको जबरन श्रमिक शिविर (Labor Camp) में डाल दिया जाता है।


10. कड़े कानून – छोटी गलती = बड़ी सज़ा

विदेशी फिल्म देखना, गाना सुनना या किताब रखना — ये सब मौत या उम्रकैद की वजह बन सकते हैं।


11. नकली शहर – दिखावे की दुनिया

जब कोई विदेशी प्रतिनिधिमंडल उत्तर कोरिया आता है, तो उन्हें एक “नकली” शहर दिखाया जाता है।

जहाँ लोग हँसते हैं, हाथ हिलाते हैं और अच्छा दिखाने की एक्टिंग करते हैं।

असल ज़िंदगी उनसे बहुत अलग होती है।


12. आम लोगों की हकीकत

उत्तर कोरिया के आम लोग डरे हुए, सीमित जानकारी वाले और बहुत सादा जीवन जीते हैं।

गांवों में भुखमरी, बीमारी और गरीबी आम है — लेकिन कोई शिकायत नहीं कर सकता।


13. आज़ादी की कोशिश?

कुछ लोग चीन या दक्षिण कोरिया भागने की कोशिश करते हैं।

लेकिन रास्ता बहुत खतरनाक होता है।

कई बार लोग सीमा पर गोली मार दिए जाते हैं, या ज़िंदा पकड़ कर जेल में डाल दिए जाते हैं।


क्या हम शुक्रगुज़ार हैं?

दोस्तों!

उत्तर कोरिया की हकीकत हमें एक फिल्म जैसी लग सकती है — लेकिन वहाँ के लोगों के लिए यह रोज़ की ज़िंदगी है।

हम जिस आज़ादी में जी रहे हैं — जहाँ बोलने, पहनने, पढ़ने, घूमने और सोचने की आज़ादी है — वो उनके लिए एक सपना है।

तो क्यों न आज हम इस आज़ादी के लिए शुक्रिया अदा करें?


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  • सैफुल्लाह कमर शिबली

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