प्रकृति जब अपना क्रोध दिखाती है तो इंसान की बनाई हुई सारी चीज़ें पल भर में नष्ट हो जाती हैं। दुनिया में अब तक जितने भी तूफ़ान आए हैं, उनमें से सबसे खतरनाक और सबसे ज़्यादा जान लेने वाला तूफ़ान था भोला़ चक्रवात (Bhola Cyclone)। यह तूफ़ान 13 नवम्बर 1970 को आया था और इसने मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी को जन्म दिया।
भोला़ तूफ़ान कहाँ आया?
यह तूफ़ान बंगाल की खाड़ी में बना था। यहाँ समुद्र का पानी गर्म हो जाता है और यही गर्मी तेज़ हवाओं और तूफ़ान को जन्म देती है।
भोला़ तूफ़ान सीधे टकराया:
- उस समय के पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) से
- और भारत के पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों से
तूफ़ान की गति और समुद्री लहरें
- हवा की रफ़्तार लगभग 185 किलोमीटर प्रति घंटा थी।
- समुद्र में उठी लहरें 10 मीटर (30 फ़ीट) ऊँची थीं।
- ये लहरें तटवर्ती इलाकों में घुस गईं और पूरे-के-पूरे गाँव बहा ले गईं।
मौत और तबाही
भोला़ चक्रवात ने इतनी भयानक तबाही मचाई कि आज भी इसे याद करके रूह कांप उठती है।
- अनुमानित 3 लाख से 5 लाख लोग मारे गए।
- लाखों झोपड़ियाँ और घर नष्ट हो गए।
- हज़ारों मवेशी और खेत-खलिहान बर्बाद हो गए।
- खाने-पीने की भीषण समस्या खड़ी हो गई और लोग महीनों तक त्रासदी झेलते रहे।
यह आँकड़े इसे मानव इतिहास का सबसे घातक तूफ़ान बनाते हैं।
क्यों हुई इतनी बड़ी तबाही?
- यह तूफ़ान रात में आया, जब ज़्यादातर लोग सो रहे थे।
- समुद्र की ऊँची लहरें अचानक गाँवों में घुस गईं।
- लोगों को चेतावनी देने का सिस्टम (Weather Forecasting) बहुत कमज़ोर था।
- सरकार की राहत और बचाव कार्य समय पर नहीं पहुँचा।
राजनीतिक असर – एक नए देश का जन्म
भोला़ तूफ़ान ने सिर्फ़ इंसानों की ज़िंदगियाँ ही नहीं छीनीं बल्कि दक्षिण एशिया की राजनीति बदल दी।
- पूर्वी पाकिस्तान के लोगों को लगा कि पश्चिमी पाकिस्तान की सरकार ने उनकी मदद नहीं की।
- इससे वहाँ गुस्सा और विद्रोह की भावना बढ़ी।
- यह असंतोष आगे चलकर 1971 के युद्ध और बांग्लादेश की आज़ादी का कारण बना।
यानि कि एक प्राकृतिक आपदा ने एक नए देश को जन्म दिया।
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भोला़ तूफ़ान से सीख
- प्रकृति को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
- समय रहते चेतावनी देने वाली तकनीक और बचाव प्रणाली मज़बूत होनी चाहिए।
- इंसानों को एक-दूसरे की मदद करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
- हमें पर्यावरण को सुरक्षित रखना होगा, क्योंकि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) भविष्य में और भी बड़े तूफ़ानों को जन्म दे सकता है।
भोला़ चक्रवात 1970 सिर्फ़ एक तूफ़ान नहीं था, बल्कि एक ऐसी त्रासदी थी जिसने लाखों जिंदगियों को लील लिया और इतिहास की दिशा बदल दी। यह हमें यह सिखाता है कि इंसान चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, प्रकृति के सामने उसकी शक्ति बहुत छोटी है।