चीन का सबसे बड़ा अकाल

चीन का सबसे बड़ा अकाल (1959–1961) मानव इतिहास का सबसे बड़ा अकाल माना जाता है। इसमें लगभग 3 करोड़ लोग भूख और कुपोषण से मर गए। यह क़हत सिर्फ़ प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि गलत सरकारी नीतियों और सच छुपाने की वजह से और भी भयावह बन गया। यह पोस्ट आपको इस त्रासदी की पूरी कहानी आसान हिंदी में बताएगी।


चीन का सबसे बड़ा अकाल जिसे 1959 से 1961 के बीच महान चीनी अकाल (Great Chinese Famine) के नाम से जाना जाता है, इंसानी इतिहास का सबसे भयानक और जानलेवा अकाल था। इस अकाल  में करोड़ों लोग भूख, कुपोषण और सरकारी नीतियों की विफलताओं की वजह से  मौत के शिकार हुए। यह सिर्फ  प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि इंसानी  गलतियों और ‘महान छलांग आगे’ जैसी असफल नीतियों का भी नतीजा  था।

 

चीन का सबसे बड़ा अकाल
चीन का सबसे बड़ा अकाल

 

अकाल की शुरुआत कैसे हुई?

1950 के दशक में चीन ने अपने देश को तेज़ी से औद्योगिक बनाने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए “ग्रेट लीप फ़ॉरवर्ड” (Great Leap Forward) नाम की योजना शुरू की।

इसमें किसानों को सामूहिक खेती (Collective Farming) के लिए मजबूर किया गया।

छोटे–छोटे खेतों को मिलाकर बड़े कम्यून (Communes) बना दिए गए।

किसानों से कहा गया कि वे अनाज ज़्यादा पैदा करें और स्टील बनाने में भी हाथ बँटाएँ।
लेकिन इस योजना में कई ग़लतियाँ थीं।

पहली – खेती पर ध्यान कम हो गया– क्योंकि किसानों से कारख़ानों में काम करवाया गया।

दुसरी – अनाज उत्पादन के आँकड़े झूठे दिखाए गए – अधिकारी ऊपर वालों को खुश करने के लिए अनाज की पैदावार ज़्यादा बताने लगे।

तीसरी- अनाज की सप्लाई जारी रही – सरकार ने अनाज की कमी होते हुए भी विदेशों में सप्लाई जारी रखा !


 

प्राकृतिक कारण

इसी समय चीन में लगातार सूखा और बाढ़ आई, जिससे फ़सलें बर्बाद हो गईं। पहले से ही गलत सरकारी नीतियाँ और ऊपर से प्राकृतिक आपदा ने हालात और बिगाड़ दिए और यह चीन

ज्यादा जानकारी के लिए लिंक….https://en.wikipedia.org/wiki/Great_Chinese_Famine


 

चीन के सबसे बड़े अकाल का असर

1959 से 1961 तक पूरे चीन में भयानक स्थिति बन गई।

गाँव–गाँव में लोग भूख से मरने लगे।बच्चों को खाना नहीं मिल पाया और लाखों बच्चे कुपोषण से मर गए। लोग पेड़ों की छाल, जंगली घास, चूहे, साँप और यहाँ तक कि मिट्टी तक खाकर ज़िंदा रहने की कोशिश करते रहे। इतिहासकारों के अनुसार चीन के सबसे बड़े अकाल में लगभ3 करोड़ लोग (30 Million) मर गए।


 

मौत की असली वजहें

पहली – सरकारी नीतियों की विफलता – उत्पादन को बढ़ाने के बजाय योजनाएँ उलटी पड़ गईं।

दुसरी – सूचना छुपाना – स्थानीय अधिकारी सच्चाई बताने के बजाय झूठे आँकड़े पेश करते रहे।

तीसरी- अनाज की जबरन वसूली – किसानों के घरों से अनाज सरकार के गोदामों में भर लिया गया, लेकिन उन्हें खाने के लिए कुछ भी नहीं मिला।

चौथी – कुपोषण और बीमारियाँ – भूख से कमज़ोर लोगों में बीमारियाँ फैल गईं।


इस समय चीन की सरकार ने क़हत की सच्चाई दुनिया से छुपाई। बाहर की दुनिया को मालूम ही नहीं था कि चीन में करोड़ों लोग भूख से मर रहे हैं। बाद में जब दस्तावेज़ और गवाहियाँ सामने आईं तो पता चला कि यह इतिहास का सबसे बड़ा मानव निर्मित क़हत था।

इसे भी पढ़ें…….https://raushanknowledge.com/bhola-cyclone-1970-sabse-khatarnak-tufan/


 

इतिहासकारों की राय

कुछ इतिहासकार चीन के सबसे बड़े अकाल को पूरी तरह प्राकृतिक आपदा मानते हैं, लेकिन ज़्यादातर का मानना है कि यह सरकारी नीतियों और गलत फैसलों की वजह से हुआ था।

दोस्तों – यह अकाल हमें यह सिखाता है कि अगर सरकारें ज़बरदस्ती और बिना योजना के बड़े–बड़े प्रयोग करें, तो जनता को इसकी बहुत भारी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है


 

1959 से 1961 के बीच आया चीन का सबसे बड़ा अकाल सिर्फ़ भूख की त्रासदी नहीं था, बल्कि यह इंसानी ग़लतियों, गलत नीतियों और सच्चाई छुपाने का नतीजा था।

इस क़हत ने करोड़ों ज़िंदगियाँ निगल लीं।

बच्चों, औरतों और बुज़ुर्गों पर इसका सबसे गहरा असर पड़ा।

यह हमें याद दिलाता है कि इंसान की बनाई नीतियाँ कभी–कभी प्राकृतिक आपदाओं से भी ज़्यादा ख़तरनाक हो सकती हैं।


 

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