बनी इसराइल की पूरी कहानी – एक इबरत भरी दास्तान
दुनिया की इतिहास में कुछ क़ौमें ऐसी हैं जिनका ज़िक्र बार-बार आता है। उन ही क़ौमों में से एक क़ौम बनी इसराइल है।
क़ुरआन शरीफ़ में भी इस क़ौम का ज़िक्र बहुत बार किया गया है।
लेकिन सवाल यह है कि बनी इसराइल कौन थे? उनकी शुरुआत कहाँ से हुई? अल्लाह ने उन्हें इतनी नेमतें क्यों दीं? और फिर उनका पतन क्यों हुआ?
इस लेख में हम बनी इसराइल की पूरी कहानी को आसान भाषा में समझने की कोशिश करेंगे।

बनी इसराइल कौन थे?
सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि बनी इसराइल का मतलब क्या है।
“बनी” का मतलब होता है औलाद या वंश और “इसराइल” दरअसल हज़रत याक़ूब अलैहिस्सलाम का एक लकब था।
इस तरह बनी इसराइल का मतलब है हज़रत याक़ूब अलैहिस्सलाम की औलाद।
हज़रत याक़ूब अलैहिस्सलाम, हज़रत इसहाक अलैहिस्सलाम के बेटे और हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पोते थे।
हज़रत याक़ूब अलैहिस्सलाम के बारह बेटे थे। इन्हीं बारह बेटों की नस्ल से बारह क़बीले बने और आगे चलकर यही लोग बनी इसराइल कहलाए।
हज़रत यूसुफ अलैहिस्सलाम और मिस्र का वाक़िया
बनी इसराइल की कहानी का एक बड़ा हिस्सा हज़रत यूसुफ अलैहिस्सलाम से जुड़ा हुआ है।
हज़रत याक़ूब अलैहिस्सलाम के बेटे हज़रत यूसुफ अलैहिस्सलाम को उनके भाइयों ने जलन की वजह से एक कुएँ में डाल दिया था। बाद में कुछ लोग उन्हें निकालकर मिस्र ले गए।
अल्लाह की मदद से हज़रत यूसुफ अलैहिस्सलाम आगे चलकर मिस्र के बादशाह बन गए।
जब कनआन और आसपास के इलाक़ों में भयानक अकाल पड़ा तो हज़रत यूसुफ अलैहिस्सलाम ने अपने पिता हज़रत याक़ूब अलैहिस्सलाम और पूरे परिवार को मिस्र बुला लिया।
इस तरह बनी इसराइल मिस्र में आकर बस गए।

फिरऔन का ज़ुल्म
समय बीतता गया और मिस्र में एक ऐसा बादशाह आया जिसे क़ुरआन में फिरऔन कहा गया है।
फिरऔन को डर था कि बनी इसराइल की आबादी बहुत बढ़ जाएगी और वे उसकी हुकूमत के लिए ख़तरा बन सकते हैं।
इसलिए उसने बनी इसराइल पर बहुत ज़ुल्म करना शुरू कर दिया।
क़ुरआन के अनुसार:
- बनी इसराइल को ग़ुलाम बना लिया गया
- उनसे बहुत कठिन काम करवाया जाता था
- उनके नवजात बेटों को मार दिया जाता था
- और लड़कियों को ज़िंदा छोड़ दिया जाता था
यह बनी इसराइल के इतिहास का सबसे कठिन दौर था।
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की पैदाइश
इसी ज़ुल्म के दौर में अल्लाह ने एक महान नबी को पैदा किया, जिनका नाम था हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम।
फिरऔन ने आदेश दिया था कि बनी इसराइल के पैदा होने वाले लड़कों को मार दिया जाए। इसलिए हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की माँ ने अल्लाह के भरोसे उन्हें एक संदूक में रखकर दरिया-ए-नील में बहा दिया।
अल्लाह की कुदरत देखिए कि वह संदूक सीधे फिरऔन के महल तक पहुँच गया।
फिरऔन की पत्नी आसिया ने उस बच्चे को अपना बेटा बना लिया।
इस तरह जिस फिरऔन को बनी इसराइल के बच्चों से डर था, उसी के घर में अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम की परवरिश कराई।
मूसा अलैहिस्सलाम की नुबूवत और फिरऔन से मुक़ाबला
जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम बड़े हुए तो अल्लाह ने उन्हें नुबूवत दी और आदेश दिया कि फिरऔन के पास जाकर उसे अल्लाह का पैग़ाम सुनाएँ।
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम अपने भाई हज़रत हारून अलैहिस्सलाम के साथ फिरऔन के पास गए।
लेकिन फिरऔन ने घमंड किया और ईमान लाने से इनकार कर दिया।
अल्लाह ने उसे चेतावनी देने के लिए कई निशानियाँ भेजीं, जैसे:
- बाढ़
- टिड्डियाँ
- जुएँ
- मेंढक
- पानी का खून बन जाना
फिर भी फिरऔन ने सच को स्वीकार नहीं किया।
समंदर का महान चमत्कार
आख़िरकार अल्लाह ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को आदेश दिया कि बनी इसराइल को लेकर मिस्र से निकल जाएँ।
फिरऔन अपनी सेना के साथ उनका पीछा करने लगा।
आगे समुद्र था और पीछे फिरऔन की सेना।
उस समय अल्लाह ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को आदेश दिया कि अपनी लाठी समुद्र पर मारें।
जैसे ही उन्होंने लाठी मारी, समुद्र दो हिस्सों में बँट गया और बीच में सूखा रास्ता बन गया।
बनी इसराइल उस रास्ते से सुरक्षित निकल गए।
जब फिरऔन अपनी सेना के साथ उसी रास्ते में दाख़िल हुआ तो समुद्र फिर से मिल गया और फिरऔन अपनी सेना के साथ डूब गया।
यह इतिहास के सबसे महान चमत्कारों में से एक था।

सहराए सीना का दौर
मिस्र से निकलने के बाद बनी इसराइल सहराए सीना (सीनाई का रेगिस्तान) में पहुँचे।
यहाँ अल्लाह ने उन पर कई नेमतें नाज़िल कीं।
जैसे:
- आसमान से मन और सलवा का खाना
- गर्मी से बचाने के लिए बादलों का साया
- हज़रत मूसा की लाठी से पानी के चश्मे निकलना
लेकिन इसके बावजूद बनी इसराइल बार-बार नाफ़रमानी करते रहे।
बछड़े की पूजा
जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम तूर पहाड़ पर अल्लाह से बात करने गए तो उनकी ग़ैर-मौजूदगी में एक व्यक्ति सामरी ने सोने का एक बछड़ा बना दिया।
बनी इसराइल के कुछ लोग उस बछड़े की पूजा करने लगे।
यह एक बहुत बड़ी ग़लती और गुमराही थी।
जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम वापस आए तो उन्होंने इस शिर्क की कड़ी निंदा की।
बनी इसराइल में भेजे गए नबी
अल्लाह ने बनी इसराइल में बहुत से नबी भेजे।
उनमें से कुछ प्रमुख नबी यह हैं:
- हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम
- हज़रत हारून अलैहिस्सलाम
- हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम
- हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम
- हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम
- हज़रत यह्या अलैहिस्सलाम
- हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम
लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि बनी इसराइल ने कई नबियों की बात नहीं मानी और कुछ नबियों को तो क़त्ल भी कर दिया।
हज़रत दाऊद और हज़रत सुलेमान का दौर
बनी इसराइल के इतिहास में एक सुनहरा दौर भी आया।
यह दौर था हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम और उनके बेटे हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम का।
हज़रत दाऊद को अल्लाह ने नुबूवत भी दी और बादशाहत भी।
हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने एक महान सल्तनत दी।
उनके अधीन:
- इंसान
- जिन्न
- परिंदे
- हवाएँ
सब काम करते थे।
यह बनी इसराइल का सबसे ताक़तवर दौर था।
पतन की शुरुआत
हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम के बाद बनी इसराइल में आपसी झगड़े शुरू हो गए।
उनकी सल्तनत दो हिस्सों में बँट गई।
फिर उन पर कई दुश्मनों ने हमला किया।
आख़िरकार बाबुल के बादशाह बुख़्त नस्र ने हमला करके उनकी सल्तनत को तबाह कर दिया और बहुत से लोगों को क़ैदी बनाकर बाबुल ले गया।
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम का दौर
बाद में बनी इसराइल में हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को नबी बनाकर भेजा गया।
उन्होंने लोगों को अल्लाह की इबादत की तरफ बुलाया।
लेकिन बनी इसराइल के कई आलिम और सरदार उनके विरोधी बन गए।
उन्होंने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को क़त्ल करने की साज़िश भी की।
लेकिन अल्लाह ने उन्हें आसमान पर उठा लिया।
आज के यहूदी और बनी इसराइल
आज दुनिया में जो लोग यहूदी कहलाते हैं, वे अपने आप को बनी इसराइल की नस्ल बताते हैं।
लेकिन क़ुरआन हमें यह सिखाता है कि असली इज़्ज़त नस्ल से नहीं बल्कि अच्छे कामों से मिलती है।
अल्लाह ने बनी इसराइल को बहुत इज़्ज़त दी थी, लेकिन जब उन्होंने नाफ़रमानी की तो उनका पतन शुरू हो गया।
बनी इसराइल की कहानी हमें कई बड़ी सीख देती है:
- अल्लाह जिसे चाहे इज़्ज़त देता है
- नाफ़रमानी करने वाली क़ौमें तबाह हो जाती हैं
- नबियों का विरोध करने का अंजाम बहुत बुरा होता है
- शुक्रगुज़ार क़ौमें ही तरक़्क़ी करती हैं
बनी इसराइल की कहानी सिर्फ़ एक क़ौम की कहानी नहीं है, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए एक बड़ी इबरत है।
क़ुरआन बार-बार इन घटनाओं को बयान करके हमें यही संदेश देता है कि इंसान को हमेशा सच का साथ देना चाहिए और अल्लाह के हुक्मों पर चलना चाहिए।


