दुनिया का सबसे बड़ा प्लेन हादसा – टेनेरीफ़ हवाई हादसा 1977

1977 में स्पेन के टेनेरीफ़ द्वीप पर हुआ हवाई हादसा इतिहास का सबसे बड़ा विमान हादसा माना जाता है। इसमें दो बोइंग 747 जंबो जेट्स की टक्कर में 583 लोगों की मौत हुई। जानिए इस त्रासदी की पूरी कहानी और इससे सीखे गए सबक।

हवाई जहाज़ आधुनिक इंसान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। यह हमें कुछ ही घंटों में एक देश से दूसरे देश पहुँचा देता है। लेकिन जब तकनीक और लापरवाही आपस में टकराती हैं तो नतीजा एक ऐसी त्रासदी होती है जिसे इतिहास कभी नहीं भूल पाता। दुनिया के सबसे बड़े प्लेन हादसे की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसे “टेनेरीफ़ एयरपोर्ट डिज़ास्टर” कहा जाता है।

यह हादसा 27 मार्च 1977 को हुआ था और इसमें एक साथ 583 लोग मारे गए, जो अब तक का सबसे बड़ा और सबसे भयावह हवाई हादसा माना जाता है।


हादसा कहाँ और कैसे हुआ?

यह घटना स्पेन के कैनरी द्वीप (Canary Islands) में स्थित टेनेरीफ़ द्वीप (Tenerife Island) पर हुई। उस दिन मौसम बेहद खराब था – घना कोहरा, कम विज़िबिलिटी और लगातार बारिश।

उस समय दुनिया की दो सबसे बड़ी एयरलाइन्स –

  • KLM रॉयल डच एयरलाइन्स (नीदरलैंड्स की)
  • पैन अमेरिकन वर्ल्ड एयरवेज (Pan Am) (अमेरिका की)

के विशाल बोइंग 747 जंबो जेट टेनेरीफ़ एयरपोर्ट पर एक साथ खड़े थे। असल में दोनों प्लेन को पास के “लास पामास एयरपोर्ट” जाना था, लेकिन वहाँ बम धमाके की वजह से उन्हें टेनेरीफ़ पर डायवर्ट कर दिया गया।


हादसे की शुरुआत

हवाई अड्डा छोटा था और अचानक इतने बड़े-बड़े विमानों की भीड़ से वहाँ अव्यवस्था फैल गई। दोनों जंबो जेट्स को एक ही रनवे का इस्तेमाल करना पड़ा।

  • KLM का विमान टेकऑफ़ के लिए रनवे पर खड़ा था।
  • Pan Am का विमान उसी रनवे पर टैक्सी करते हुए निकल रहा था।

लेकिन खराब मौसम, कोहरे और गलतफहमी ने इस स्थिति को बेहद खतरनाक बना दिया।


गलतफ़हमियों की श्रृंखला

  1. रेडियो पर मिसकम्यूनिकेशन:
    KLM के पायलट ने सोचा कि उन्हें टेकऑफ़ की अनुमति मिल गई है, जबकि असल में कंट्रोलर ने सिर्फ़ “स्टैंड बाय” कहा था।
  2. कोहरा और विज़िबिलिटी:
    रनवे पर घना कोहरा था, इसलिए न तो KLM का पायलट Pan Am का विमान देख पाया और न ही Pan Am वाले KLM को।
  3. जल्दबाज़ी:
    KLM का पायलट समय पर उड़ान भरना चाहता था क्योंकि उसकी क्रू ड्यूटी का समय पूरा होने वाला था। इसी वजह से उसने बिना क्लीयरेंस का इंतज़ार किए टेकऑफ़ शुरू कर दिया।

टक्कर और तबाही

जैसे ही KLM का जंबो जेट पूरी स्पीड से रनवे पर दौड़ा, सामने से Pan Am का विमान रनवे क्रॉस कर रहा था।

  • KLM का विमान जोर से Pan Am के विमान से टकरा गया।
  • टक्कर इतनी भयानक थी कि दोनों जंबो जेट्स में तुरंत आग लग गई।
  • 583 लोग मौके पर ही मारे गए

KLM के विमान में सवार लगभग सभी लोग मारे गए, जबकि Pan Am के विमान से लगभग 61 लोग किसी तरह बच निकले।


हादसे के बाद जाँच

इस हादसे ने पूरी दुनिया को हिला दिया। जाँच में सामने आया कि –

  • KLM के पायलट ने गलतफ़हमी में टेकऑफ़ शुरू किया।
  • एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल और पायलट्स के बीच संचार (Communication) साफ़ नहीं था।
  • कोहरे और छोटे एयरपोर्ट की वजह से दोनों विमान एक-दूसरे को देख नहीं पाए।

हादसे से क्या सीखा गया?

इस त्रासदी के बाद पूरी दुनिया की एविएशन इंडस्ट्री में बड़े बदलाव किए गए –

  1. रेडियो कम्यूनिकेशन में सुधार:
    अब एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल और पायलट्स के बीच इस्तेमाल होने वाले शब्द बेहद स्पष्ट और मानक (Standardized) बनाए गए।
  2. Cockpit Resource Management (CRM):
    पहले पायलट जो कहे वही अंतिम फैसला होता था। लेकिन अब क्रू को ट्रेन किया जाने लगा कि अगर कप्तान से गलती हो रही है तो दूसरा अधिकारी भी बोल सके और रोक सके।
  3. सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन:
    टेकऑफ़ और लैंडिंग के समय ज़रा भी गलती न हो, इसके लिए नियम और भी सख्त कर दिए गए।

टेनेरीफ़ का यह हादसा सिर्फ़ एक तकनीकी गलती नहीं था, बल्कि यह लापरवाही, जल्दबाज़ी और गलतफ़हमी का नतीजा था। आज भी जब भी हवाई सुरक्षा की बात होती है, इस घटना का ज़िक्र ज़रूर आता है।

इस त्रासदी ने पूरी दुनिया को सिखाया कि –

“हवाई सफर में एक छोटी सी गलती भी सैकड़ों ज़िंदगियाँ ले सकती है।”


दुनिया का सबसे बड़ा प्लेन हादसा, टेनेरीफ़ 1977, हमें यह याद दिलाता है कि इंसानी जीवन की कीमत सबसे ऊपर है। तकनीक कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, अगर इंसान सावधान न रहे तो एक पल में सबकुछ खत्म हो सकता है।

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