दुनिया की इतिहास में जासूसी हमेशा से एक रहस्यमयी और खतरनाक काम माना गया है। जासूस वो होता है जो अपने देश या किसी संगठन के लिए दुश्मन की गुप्त जानकारी चुपचाप इकट्ठा करता है। लेकिन इनमें से कुछ जासूस इतने चालाक, ख़तरनाक और असरदार साबित हुए कि उन्होंने पूरी दुनिया की राजनीति, युद्ध और ताक़त का खेल ही बदल दिया। आज हम बात करेंगे दुनिया के सबसे ख़तरनाक जासूस की।
जासूसी की दुनिया और उसकी अहमियत
जासूसी कोई नया पेशा नहीं है। प्राचीन समय से ही राजा–महाराजाओं के दरबारों में जासूस रखे जाते थे। उनकी ज़िम्मेदारी होती थी कि वे दुश्मन के राज़, सैनिकों की तादाद, हथियारों और योजनाओं की जानकारी चुपचाप अपने राजा तक पहुँचाएँ। यही कारण है कि इतिहास में कई युद्ध जासूसों की वजह से जीते या हारे गए।
आज के आधुनिक दौर में भी जासूसी का काम जारी है। हर देश की ख़ुफ़िया एजेंसी (CIA, RAW, ISI, Mossad, KGB आदि) ऐसे जासूसों को ट्रेनिंग देती है जो दुश्मन की धरती पर जाकर गुप्त जानकारी लाएँ। लेकिन इन जासूसों में से कुछ इतने माहिर और खतरनाक हुए कि उनका नाम इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
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दुनिया का सबसे ख़तरनाक जासूस – एली कोहेन (Eli Cohen)
जब भी खतरनाक जासूसों की बात होती है, तो सबसे पहला नाम आता है इज़राइल के जासूस एली कोहेन का। उन्हें दुनिया का सबसे चालाक, असरदार और खतरनाक जासूस माना जाता है।
एली कोहेन कौन थे?
- एली कोहेन का जन्म 1924 में मिस्र (Egypt) में हुआ था।
- वे मूल रूप से यहूदी थे लेकिन उन्होंने अरब देशों में खुद को अरब दिखाने का पूरा हुनर सीख लिया।
- 1960 के दशक में इज़राइल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद (Mossad) ने उन्हें सीरिया भेजा।
उन्होंने जासूसी कैसे की?
- एली कोहेन ने सीरिया में जाकर खुद को एक अरब बिज़नेसमैन “कमील थामस” के नाम से पेश किया।
- धीरे-धीरे उन्होंने सीरिया की सरकार और सेना के बड़े-बड़े अफसरों से दोस्ती कर ली।
- कोहेन इतनी चतुराई से घुलमिल गए कि उन्हें सीरियाई संसद और सैन्य ठिकानों तक का खुला प्रवेश मिल गया।
- सीरिया के कई मंत्री और अधिकारी उन्हें अपना सबसे क़रीबी दोस्त मानते थे।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि
- एली कोहेन ने सीरिया की सेना के गुप्त ठिकानों, हथियारों की जानकारी, और गोलान हाइट्स (Golan Heights) की पूरी रक्षा व्यवस्था की डिटेल इज़राइल तक पहुँचाई।
- इज़राइल ने 1967 के छः दिन के युद्ध (Six-Day War) में इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल करके सीरिया को भारी नुकसान पहुँचाया और गोलान हाइट्स पर कब्ज़ा कर लिया।
- यह सब एक अकेले जासूस की वजह से संभव हुआ।
उनका अंत कैसे हुआ?
- सीरिया को शक हो गया कि कोई अंदर से राज़ बाहर पहुँचा रहा है।
- 1965 में रेडियो सिग्नल पकड़ने की टेक्नोलॉजी से कोहेन की असलियत सामने आ गई।
- उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और कई दिनों तक पूछताछ व टॉर्चर झेला।
- अंत में 18 मई 1965 को दमिश्क (सीरिया की राजधानी) में सार्वजनिक रूप से फाँसी दी गई।
- उनकी फाँसी के वक्त हज़ारों लोग मौजूद थे।
क्यों माना जाता है उन्हें सबसे ख़तरनाक?
- एक अकेले इंसान ने पूरे देश की सेना की रणनीति उजागर कर दी।
- उनकी वजह से 1967 के युद्ध में इज़राइल ने भारी जीत दर्ज की।
- उन्होंने दुश्मन देश के नेताओं के बीच ऐसी जगह बना ली थी जो कोई और जासूस शायद ही कर पाता।
- आज भी सीरिया और इज़राइल के बीच खाई गहरी होने का एक बड़ा कारण वही माने जाते हैं।
एली कोहेन की कहानी हमें यह सिखाती है कि जासूस सिर्फ़ बंदूक या बम से खतरनाक नहीं होते, बल्कि उनकी अक़्ल, चालाकी और रणनीति दुश्मन को बर्बाद कर सकती है। यही वजह है कि उन्हें इतिहास का सबसे ख़तरनाक जासूस कहा जाता है।
दुनिया में और भी कई नामी जासूस हुए हैं – जैसे माटा हारी, रिचर्ड सोर्गे, और ऑल्ड्रिच एम्स – लेकिन एली कोहेन का नाम हमेशा शीर्ष पर रहेगा।