Saifullah Qamar Shibli
आज हम आपको एक ऐसी सच्ची और हैरान कर देने वाली कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो आपके दिल को झकझोर देगी।
ये कहानी है एक औरत की, जो कुर्सी पर बैठी, चाय का कप हाथ में लिए, टीवी के सामने… खामोशी से मर गई।
और… 42 साल तक किसी को उसके ना होने का एहसास तक नहीं हुआ!
ये कोई फिल्म नहीं, कोई काल्पनिक कहानी नहीं
बल्कि यूरोप के एक आधुनिक शहर में घटी एक सच्ची घटना है।
चलिए, तफ़सील से जानते हैं।

ये घटना कहां की है?
ये सच्ची घटना है ज़ाग्रेब (Zagreb) शहर की, जो कि क्रोएशिया की राजधानी है।
यहां एक औरत अकेली रहा करती थी, नाम था: हेडवीगा गोलिक (Hedviga Golik)
जन्म: 1924
और आखिरी बार उसे जिंदा 1966 में देखा गया।
उसके बाद जैसे वो दुनिया से गायब हो गई।
किसी ने उसे ढूंढा क्यों नहीं?
- ना किसी ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई
- ना कोई रिश्तेदार आया
- ना कोई दोस्त
- ना कोई पड़ोसी
- किसी ने जानने की ज़हमत नहीं उठाई कि वो कहां है
लोगों ने बस मान लिया कि शायद वो कहीं और चली गई होगी।
बस, बात यहीं ख़त्म।
फिर 42 साल बाद क्या हुआ?
साल 2008 में, ज़ाग्रेब के सरकारी अधिकारियों ने एक पुराने फ्लैट को दोबारा आवंटित (re-allocate) करने की प्रक्रिया शुरू की।
वो फ्लैट सालों से बंद पड़ा था, किसी ने उसमें झांका तक नहीं था۔
जब अधिकारियों ने दरवाज़ा तोड़ा —
तो अंदर का नज़ारा चौंका देने वाला था।
अंदर क्या देखा गया?
एक कुर्सी पर हेडवीगा गोलिक का शव था।
सामने रखा था एक पुराना ब्लैक एंड व्हाइट टीवी — शायद 1966 में आखिरी बार चला था।
पास में चाय का कप रखा था।
और वो औरत… मर चुकी थी।
मगर उसका शरीर सड़ने के बजाय प्राकृतिक रूप से ममीफाइड (Mummified) हो गया था।
जैसे अभी भी वहीं बैठी हो, लेकिन असल में वो वहां 42 साल से मरी हुई थी।
किसी को पता क्यों नहीं चला?
क्योंकि:
- उसके कोई करीबी नहीं थे
- फ्लैट उसकी अपनी मिल्कियत थी
- किसी ने कभी खिड़की से झांकने की जरूरत नहीं समझी
- सबने मान लिया कि वो कहीं और शिफ्ट हो गई है
- और सबसे बड़ा कारण… किसी को फर्क ही नहीं पड़ा।
इस घटना से हमें क्या सीख मिलती है?
- अकेलापन मौत से भी ज़्यादा खतरनाक होता है
- अपने आसपास के लोगों से जुड़कर रहना ज़रूरी है
- रिश्तों की अहमियत सबसे बड़ी होती है
- इंसान को रोटी से पहले “तवज्जो” चाहिए होती है
- कोई भी इंसान यूं अकेला मर जाए, ये समाज के लिए एक शर्मनाक सवाल है
इस्लामी नज़रिया:
इस्लाम में रिश्तों की अहमियत बहुत गहरी है।
पड़ोसी का ख्याल रखना, अकेले लोगों से मिलना, और रिश्तेदारों से रिश्ता जोड़े रखना, ये सब अल्लाह के हुक्म हैं।
नबी करीम ﷺ ने फरमाया:
“वो शख्स मोमिन नहीं हो सकता जो खुद तो पेट भर के खाए और उसका पड़ोसी भूखा रहे।”
(सहीह बुखारी)
तो सोचिए, अगर कोई औरत मर जाए और 42 साल तक किसी को पता भी न चले,
तो क्या ये इंसानियत का चेहरा है?
Japanese Qaum ki Zindagi…. https://youtu.be/GXIBxgwjq1I
ज़िंदगी बहुत नाज़ुक है।
अगर आपके आस-पास कोई अकेला है , तो बस एक बार पूछ लीजिए:
“आप कैसे हैं?”
कभी-कभी सिर्फ एक सवाल…
किसी की जान बचा लेता है۔