इस्लाम की सबसे बड़ी हिजरत – मक्का से मदीना तक

इस पोस्ट में मक्का से मदीना की हिजरत की सच्ची और प्रेरणादायक कहानी बताई गई है, जब पैगंबर मुहम्मद ﷺ ने अल्लाह के हुक्म से अपने साथियों के साथ मक्का छोड़ा। यह घटना इस्लामी इतिहास का एक अहम मोड़ है जो हमें सब्र, तवक्कुल और अल्लाह पर भरोसे की सीख देती है

“हिजरत” का मतलब होता है — एक जगह से दूसरी जगह जाना, सिर्फ़ अल्लाह की खातिर
इस्लाम के इतिहास में सबसे अहम हिजरत हुई थी 570 ईस्वी में पैगंबर मुहम्मद ﷺ और उनके साथियों की, जब उन्होंने मक्का से मदीना का सफर किया।


1. मक्का में मुसलमानों पर ज़ुल्म

  • शुरू में इस्लाम को सिर्फ़ कुछ लोगों ने अपनाया।
  • लेकिन मक्का के बड़े लोग (मुख्य रूप से क़ुरैश कबीला) मुसलमानों के खिलाफ हो गए।
  • उन्हें तंग किया गया, मारपीट हुई, रोज़गार छीने गए, और घरों से निकाला गया
  • मुसलमान बहुत मुश्किल में थे, लेकिन अल्लाह पर भरोसा रखते थे

🤝 2. मदीना से आई उम्मीद की किरण

  • मदीना (उस वक्त का नाम था स्रब) के कुछ लोगों ने इस्लाम कबूल कर लिया था।
  • उन्होंने मक्का आकर पैगंबर ﷺ से मुलाकात की और वादा किया: “हम आपकी हिफ़ाज़त करेंगे, आप हमारे पास मदीना आ जाइए।”

🚶‍♂️ 3. हिजरत की शुरुआत

  • पैगंबर ﷺ ने मुसलमानों को धीरे-धीरे मदीना जाने को कहा।
  • कई लोग चुपचाप मक्का छोड़कर मदीना पहुँचने लगे।
  • आख़िर में पैगंबर ﷺ ने अबू बक्र  के साथ मक्का छोड़ा।

🕳️ 4. ग़ार-ए-सौर (एक गुफा की कहानी)

  • क़ुरैश ने पैगंबर ﷺ को मारने की योजना बनाई थी।
  • दोनों ने सौर नाम की गुफा में तीन दिन छिपकर अल्लाह से मदद मांगी।
  • अल्लाह ने दुआ कुबूल किया:
    • मकड़ी ने गुफा के मुंह पर जाला बुन दिया
    • कबूतर ने अंडे दे दिए
    • दुश्मन सोचकर लौट गए कि अंदर कोई नहीं गया।

🌇 5. मदीना में शानदार स्वागत

  • जब पैगंबर ﷺ मदीना पहुँचे तो वहां के लोगों ने उनका दिल से स्वागत किया।
  • बच्चे, औरतें, बूढ़े सब खुश थे।
  • बच्चों ने गीत गाया: “तला अल-बद्रु अलैना…”
    (हम पर पूरा चाँद चमक उठा है)

📆 6. इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत

  • इस हिजरत के साल को इस्लामिक इतिहास में “1 हिजरी” कहा गया।
  • यहीं से इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत हुई।

📘 7. हमें क्या सिख मिलती है?

  1. मुश्किल वक्त में भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
  2. सच का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन आख़िर में जीत उसी की होती है।
  3. जो लोग अल्लाह के लिए सब छोड़ते हैं, अल्लाह उन्हें बेहतर देता है।
  4. भाईचारा, सबर और हिम्मत इस्लाम की बुनियाद हैं।

📌 यह हिजरत इस्लाम के इतिहास की सबसे बड़ी और अहम घटना है, जिसने इस्लामी समाज की नींव रखी।

✍️ – सैफुल्लाह कमर शिबली


Leave a Reply

Scroll to Top