रमज़ान के रोज़े क्यों रखे जाते हैं? कुरआन, हदीस और साइंस की रोशनी में
रमज़ान के रोज़े को बहुत लोग सिर्फ़ “भूखा-प्यासा रहना” समझ लेते हैं। लेकिन असल में यह एक मुकम्मल तालीम है—
नफ़्स की इस्लाह, समाज में हमदर्दी, और इंसाफ़ की बुनियाद। कुरआन में साफ़ एलान है:
“ऐ ईमान वालों! तुम पर रोज़े फ़र्ज़ किए गए, जैसे तुमसे पहले लोगों पर किए गए थे, ताकि तुम तक़वा हासिल करो।”
— सूरह अल-बक़रह 2:183



