आज की दुनिया में हर देश दूसरे देश से व्यापार (Trade) करता है। एक देश दूसरे देश से सामान खरीदता है (Import) और अपना सामान दूसरे देशों को बेचता है (Export)। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई सामान दूसरे देश से हमारे देश में आता है, तो उसकी कीमत कभी ज़्यादा क्यों हो जाती है?
इसकी एक बड़ी वजह होती है – टैरिफ (Tariff)।
टैरिफ क्या है?
सीधे शब्दों में कहें तो टैरिफ एक तरह का टैक्स या शुल्क है, जो एक देश अपने यहाँ आने वाले विदेशी माल (Imported Goods) पर लगाता है।
यानि अगर भारत, चीन से मोबाइल फोन मँगाता है, तो सरकार उस मोबाइल पर एक अतिरिक्त टैक्स लगा सकती है। इस टैक्स को ही टैरिफ कहते हैं।
टैरिफ क्यों लगाया जाता है?
टैरिफ लगाने के पीछे कई कारण होते हैं:
- अपने देश की कंपनियों की रक्षा करना
- अगर बाहर से बहुत सस्ता सामान आ जाएगा, तो हमारे देश की कंपनियाँ अपना सामान बेच नहीं पाएंगी और धीरे-धीरे बंद हो सकती हैं।
- इसलिए सरकार टैरिफ लगाकर विदेशी सामान को महँगा कर देती है, ताकि देश की कंपनियाँ सुरक्षित रहें।
- सरकार की कमाई बढ़ाना
- जब कोई विदेशी सामान देश में आता है और उस पर टैक्स (टैरिफ) लगता है, तो यह पैसा सरकार के खाते में जाता है।
- इससे सरकार को विकास के कामों के लिए धन मिलता है।
- विदेशी दबाव कम करना
- अगर कोई देश बहुत ज़्यादा सामान हमारे यहाँ बेच रहा है और हमारे उद्योग को नुकसान पहुँचा रहा है, तो हम टैरिफ बढ़ाकर उस पर रोक लगा सकते हैं।
टैरिफ का एक आसान उदाहरण
मान लीजिए:
- चीन से भारत में एक मोबाइल आता है जिसकी असली कीमत 10,000 रुपये है।
- भारत सरकार उस पर 40% टैरिफ (Tax) लगा देती है।
👉 तो अब वह मोबाइल भारत में आएगा:
10,000 + 40% (4000) = 14,000 रुपये में।
यानि भारतीय ग्राहक को वही मोबाइल 14,000 रुपये में मिलेगा।
अब अगर भारत की कोई कंपनी वही मोबाइल 12,000 रुपये में बेचती है, तो लोग चीन वाला मोबाइल खरीदने से पहले सोचेंगे।
इस तरह भारतीय कंपनी को फायदा होगा और उसका बिज़नेस बचा रहेगा।
टैरिफ से किसे फ़ायदा और किसे नुकसान?
फ़ायदा:
- स्थानीय कंपनियों (Domestic Companies) को फायदा होता है क्योंकि उनका सामान विदेशी सामान से सस्ता पड़ता है।
- सरकार को फायदा होता है क्योंकि टैरिफ से उसे अतिरिक्त टैक्स मिलता है।
नुकसान:
- ग्राहकों (Consumers) को नुकसान होता है क्योंकि उन्हें वही विदेशी सामान महँगा खरीदना पड़ता है।
- विदेशी कंपनियों को नुकसान होता है क्योंकि उनका सामान महँगा हो जाता है और कम बिकता है।
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टैरिफ के प्रकार
- Import Tariff (आयात शुल्क) – जब किसी दूसरे देश से सामान मँगाने पर टैक्स लगाया जाता है।
- Export Tariff (निर्यात शुल्क) – जब अपना सामान दूसरे देश को बेचने पर टैक्स लगाया जाता है। (यह बहुत कम होता है।)
- Protective Tariff (सुरक्षात्मक शुल्क) – ताकि अपने देश की कंपनियाँ सुरक्षित रहें।
- Revenue Tariff (राजस्व शुल्क) – ताकि सरकार की आमदनी बढ़े।
टैरिफ एक आर्थिक हथियार है, जिसे सरकारें अपने देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने, स्थानीय उद्योग को बचाने और राजस्व (Revenue) बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करती हैं।
सीधे शब्दों में कहें तो –
“टैरिफ वो चाबी है जिससे सरकार विदेशी सामान की कीमत को नियंत्रित करती है।”
अगर टैरिफ न लगाया जाए तो बाहर का सस्ता सामान देशी कंपनियों को बर्बाद कर सकता है। लेकिन अगर ज़्यादा टैरिफ लगाया जाए तो ग्राहकों की जेब पर बोझ पड़ता है। इसलिए इसे बहुत सोच-समझकर लगाया जाता है।